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मंगलवार, 13 जुलाई 2010

ये जुदाई

आज दूर है मुझसे तू जितनी ,
कल उतने ही करीब होगी,
आज अँधेरा है जीवन मेरा,
कल सहर भी जरुर होगी,
मन की उजाला मिल गया मुझको,मगर
ये अँधेरा कब दूर होगी!
अलस भोर मे मंदिर की घंटिया तुम्हे मरी याद दिलाएगी,
दूर कही बहती झरने की कल-कल से मेरी आवाज आयेगी,
माना की मैने गलती की है,
मगर मै कोई फरिस्ता नहीं,
मै आज रोता हूँ, तुम्हे याद करके,
कल तू ही मुझे मनायेगी,
आज मजबूर है मेरे हाँथ,
लिखने को तुझे याद कर के,
कल मेरी याद तुझे भी रुलायेगी,
मेरा प्यार कोई रेत का महल नहीं,
जिसे हिज्र की ज्वार उड़ा ले जायेगी,
ये मेरा प्यार है,सुनामी भी शर्मा के चली जायेगी,
जब भी हवा का रुख बदलेगा,
तुम्हे मेरी याद आयेगी,
सुवह का मौसम खिला-२,
तुम्हे मेरी याद दिलायेगी,
शाम धूलि -धूलि सी होगी, मेरी याद आयेगी,
मै अब भी इबादत करता हूँ तेरी,
जाने तू कब समझ पायेगी!!!!!!!!!!!!

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