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मंगलवार, 13 जुलाई 2010

खुबसूरत बला से कभी प्यार न करना

मत रखो हसरत किसी के दीदार की,
आँखों मै मत बसना सूरत एयार की,
न जाने कब खत्म होंगी घडी इंतजार की,
वो न आयेगी तो खिल न पायेगी कली बहार की!
मिल न पाओ ज़ो उससे तो कुछ गम न करना,
खुबसूरत बला से कभी प्यार न करना,
कातिलाना अदा से तोड़ देगी दिल वो वरना,
प्यार करना मुश्किल नहीं ऐ दोस्त यहा,
मगर उसे निभाना नहीं आंसा,
प्यार तो कर लेते है सब इस जहाँ मै,
पर सच्चा प्यार पाना नहीं आसन,
कुछ फूल खिलेंगे अरमानो के,
जी कर के तुम मुस्कुरा न सकोगे,
दिल खून हों जायेगा तुम्हारा रो-रो कर,
मगर आंसू भी तुम बहा न सकोगे!
ये प्यार ऐसी चीज है ए दोस्त,
क्या-क्या तुम्हे बना देगी,
गर कुछ न बन पाओगे,वो
तमाशा तुम्हे बना देगी!.........

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